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Navic Indian GPS System (IRNSS) नाविक भारत का स्वदेशी लोकेशन पोजीशन सिस्टम

NAVIC (Indian GPS System) अथवा IRNSS (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली Indian Regional Navigational Satellite System) नाविक भारत का स्वदेशी लोकेशन पोजीशन सिस्टम। यह भारत द्वारा भारत में बनाया गया खुद का एक उच्च कोटि का उपग्रह नेविगेशन प्रणाली जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया गया है, और जो पूरी तरह से भारत सरकार के अधीन है।भारत के मछुआरों को समर्पित इस नेविगेशन को नाविक का नाम प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा दिया गया है। इसका उद्देश्य देश के हिस्से की सटीक स्थिति और देश की सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक की जानकारी नागरिकों को 5 मीटर की शुद्धता (Accuracy) से मुहैया कराना, दुसरी ओर U.S.A GPS मात्र 20 से 30 मीटर की शुद्धता (Accuracy) दे रहा है। देखने वाली बात होगी कौन किसको टक्कर देगा ।

NAVIC Coverage Area ( wikipedia.org)


NAVIC (Indian GPS System) अथवा IRNSS (Indian Regional Navigational Satellite System भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली) नाविक भारत का स्वदेशी लोकेशन पोजीशन सिस्टम।

इस श्रेणी के तहत भारत ने सात उपग्रहों को अंतरिक्ष में छोड़ा है, हाल ही में इस श्रेणी का आखिरी उपग्रह 12 अप्रेल 2019 को अंतरिक्ष में सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया गया। जबकि इसमें से केवल चार से ही हमारा काम हो जाता है, बाकी तीन उपग्रहों को उन चारों उपग्रहों के द्वारा इकट्ठी की गई जानकारी को जमा करने के लिए भेजा गया है, जिससे इसे और भी ज्यादा से ज्यादा सटीक बनाया जा सके। हर एक उपग्रह कीमत लगभग 150 करोड़ रुपए पड़ी है और वही इन सभी उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने वाला वाहन PSLV-XL लॉन्च कि कीमत 130 करोड़ रुपए पड़ी।

NAVIC Work Formation (isac)

ISRO को पहली सफलता कब मिली ?

दिन था 1 जुलाई 2013 जब ISRO द्वारा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से IRNSS-1A उपग्रह छोड़ा और लान्च के महज 20 मिनट के बाद अपनी कक्षा में स्थापित कर दिया गया। यह उपग्रह लगभग दस साल तक अपनी सेवाएं देता रहेगा। फिर उसे रिप्लेस करने के लिए दुसरा उपग्रह को भेजा जाएगा और प्रक्रिया निरंतर चलती रहेगी।

हमें खुद कि GPS System जरूरत कब और क्यों पड़ी?

जैसा कि आप जानते हैं 1999 के कारगील युद्ध में पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठिया भारतीय सीमा में घुस गये थे और वो ऐसी जगहों पर थे जिनको खोजना भारतीय सेना को थोड़ी मुसकिल हो रही थी। उस वक्त अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम Global Positioning System GPS (जीपीएस) से मदद मांगी गई और अमेरिका ने साफ साफ मना कर दिया। अगर वो दे देते तो शायद युद्ध इतना लंबा नहीं चालता। इस दौरान हम अमेरिका का चरित्र भी पहचान पाए कि उसने हमारी मदद क्यो नहीं की, क्या वो पाकिस्तान के साथ खड़ा था ? कुछ समय बाद भारत सरकार द्वारा मई 2014 को इस परियोजना को मंजूरी दे दी गई थी,आज नतीजा यह है की हम अपना GPS उपयोग करने वाले हैं।

NAVIC (Indian GPS System) अथवा IRNSS (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली Indian Regional Navigational Satellite System) नाविक भारत का स्वदेशी लोकेशन पोजीशन सिस्टम का मेन उद्देश्य मानचित्र तैयार करना, भू-स्थानिक डेटा एकत्र करना, चालकों को दृश्य और ध्वनि के लिए सही समय पर जानकारी देना, नौवहन संबंधी जानकारी प्राप्त करना, मोबाइल फोन के साथ एकीकरण, स्थलीय वायु और समुद्री नौवहन, यात्रियों को क्षेत्रीय शिपिंग के बारे में जानकारी,विभिन्न प्रकार की आपदाओं आने से पूर्व सूचनाएं देना आदि।

इसरो ISRO के अनुसार यह प्रणाली दो प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेगी। आम जनता सामान्य नौवहन सेवाऐं और दुसरा प्रतिबंधित या सीमित सेवाओं के लिए जैसे मुख्य रूप से भारतीय सेना के लिए,भारत सरकार के उच्च अधिकारी और वीआईपी और सुरक्षा संस्थान। इसके संचालन और रखरखाव के लिए भारत में लगभग 18 केंद्र स्थापित किए गए हैं।

सटीकता में (Accuracy) NAVIC vs GPS ?

प्रणाली का उद्देश्य पूरे भारतीय भूमिगत में 10 मीटर और हिंद महासागर में 20 मीटर से अधिक क्षेत्र और भारत के आसपास के क्षेत्र में लगभग 1,500 किमी (930 मील) में फैला क्षेत्र को कवर किया जायेगा। स्पेस एप्लिकेशन सेंटर ने 2017 कहा कि NAVIC 5 मीटर तक की स्थिति सटीकता के साथ सभी उपयोगकर्ताओं को सेवा प्रदान करेगा। जबकि वहीं जीपीएस केवल 20-30 मीटर की सटीकता देता है। जीपीएस को केवल एल-बैंड पर निर्भर रहना पड़ता है, एनएवीआईसी में दो (एस और एल बैंड S and L band) है। जब उपग्रह वायुमंडल के कम दाब से होकर गुजरता है, तो वायुमंडलीय गड़बड़ी के कारण इसका वेग बदल जाता है। अमेरिकी GPS बैंडो को सटीक त्रुटि (Error) का आकलन करने के लिए समय-समय पर अपडेट करने की आवश्यकता होती है। भारत के मामले में (एस और एल बैंड) की देरी में अंतर को मापने के लिए इसे अपडेट करने जरूरत नहीं होती। इसलिए Navic आवृत्ति त्रुटि को खोजने के लिए किसी भी मॉडल पर निर्भर नहीं है और GPS की तुलना में अधिक सटीक है।

किन-किन देशों के पास है खुद का GPS Location System ?

1: GPS (Global Positioning System)यह अमेरिका United States का है, इसे स्पेस साइंस इंस्टीट्यूट (NASA) द्वारा विकसित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) है। यह प्रथम प्रणाली है। First launch February 1978

2: GLONASS (Global Navigation Satellite System)यह सिस्टम रूस के ग्लोबल ऑर्बिटिंग नेविगेशन सैटेलाइट का सिस्टम है। First launch12 October 1982, Last launch17 June 2018

3: Galileo GNSS (global navigation satellite system) यह प्रणाली यूरोपीय देशों द्वारा विकसित यूरोपीय संघ का है। First launch2011

4: Beidou ( BeiDou Navigation Satellite System) सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम यह चीन का है।First launch 30 October 2000, Last launch19 November 2018,Total launches25

5: NAVIC (Indian) अथवा IRNSS (Indian Regional Navigational Satellite System) यह का भारत का स्वदेशी पोजीशन सिस्टम है,जो इस 2019 साल के अंत तक आम जनता को सेवा देना शुरू कर देगा। अभी आर्मी इसका उपयोग कर रही है। First launch1 July 2013, Last launch12 April 2018,Total launches9

NAVIC LANCH TIME (
IRNSS )

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